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नफ़रत के बाजार में मोहब्बत का फूल बांटती एक खूबसूरत घटना
उत्तर प्रदेश के बागपत जिले में गंगा-जमनी तहजीब और इंसानियत की मिसाल देखने को मिली है ! जिले के अब्दुलपुर गांव में हिंदुओं ने गरीब मुस्लिम लड़की का निकाह संपन्न कराया , इतना ही नही एक ब्राह्मण दंपति ने युवती का कन्यादान भी किया ! जानकारी के अनुसार अब्दुलपुर गांव में रहने वाले बाबू कुछ सालों से लापता हैं और उनके घर की आर्थिक स्थिति भी खराब है, जिसकी वजह से बाबू की बेटी गुलसफा की शादी कराने के लिए गांव के ही लोगों ने जिम्मेदारी ली ! 

गांव के सभी हिंदुओं ने रुपये इकट्ठे कर गुलसफा का निकाह गाजियाबाद जिले के लोनी कस्बे में रहने वाले अय्यूब के साथ बड़े ही जोर -शोर से कराया ,गांव के ही रहने वाले ब्राह्मण दम्पति गंगेश्वर और उनकी पत्नी कांता ने गुलशफा का कन्यादान भी किया ! बारात की आवभगत में ग्राम प्रधान समेत गांव के तमाम हिंदू जुट गए और बारातियों की खातिरदारी की !

नफरत फैलाने वाले विशेष वर्ग के मुंह पर करारा तमाचा है यह घटना , #जी_हां !

भारत के शीर्ष मुस्लिम स्वतंत्रता सेनानी जिन्हें साजिशन इतिहास से छुपाया गया ।। Muslim freedom fighter



ये देखिये मुसलमानों का देशप्रेम ।।  हीरे जवाहरात ना चाहत की बात कर..
हीरे जवाहरात ना चाहत की बात कर, मेरे भारत की बात कर ।


जो आसानी से मिल जाता है वो हमेशा तक नहीं रहता
जो हमेशा तक रहता है वो आसानी से नहीं मिलता

मुस्कान आर मदद यह दोनों ऐसे इत्र है
जिन्हें जितना ज्यादा लोगों पर छिड़कोगे उतने ही आप खद महकने लगोगे

भीड़ हमेशा स रस्ते पर चलती है जो रास्ता आसान लगता हो
लेकिन इसका मतलब यह नहीं की भीड़ हमेशा सही रस्ते पर चलती है

सोच अच्छी होनी चाहिए
क्योंकि नजर का इलाज हो सकता है नजरिये का नहीं

उतार चढ़ाव के बाद भी अगर कोई इंसान आपका साथ नहीं छोड़ता तो उस इंसान की कदर हमेशा करो

जिंदगी में आपको कौन कौन मिलेगा यह वक्त तय करेगा
जिंदगी में आप किस किस से मिलोगे यह आप तय करोगे
किस किस के दिलों में रहोगे ये आपका सलूक तय करेगा

कई लोग अपने व्हाट्सएप स्टेटस WhatsApp Status पर इंपॉर्टेंट जानकारी पोस्ट करते हैं। इस तरह के व्हाट्सएप स्टेटस (WhatsApp Wiki) को देखने से हमें महत्वपूर्ण जानकारियां प्राप्त होती हैं।

WhatsApp New Featuresp का इस्तेमाल लगभग हर कोई करता है। आजकल whatsapp पर तरह-तरह का स्टेटस लगाने का खूब चलन है। लोग अपने मूड के हिसाब से whatsapp status का इस्तेमाल करते हैं। या कह सकते हैं कि अपने मन की भावनाओ को व्यक्त करने के लिए लोग व्हाट्सएप्प स्टेटस का इस्तेमाल करते हैं।

बर्थडे से लेकर खास त्योहारों तक इन सबको सेलिब्रेट करने के लिए भी लोग व्हाट्सएप्प हिन्दी स्टेटस (WhatsApp Hindi Status) का इस्तेमाल करते हैं। व्हाट्सएप्प स्टेटस लोगो के बीच मे एक ऐसा जरिया बन गया है जिसके माध्यम से लोग अपने सोच एवं विचारों को लोगो के सामने व्यक्त करने लगे हैं।






सिस्टर विक्टोरिया (अब आयशा) की इस्लाम अपनाने की दास्तां बड़ी दिलचस्प है। उनका पहली बार मुसलमान और इस्लाम से सामना 2002 में तब हुआ जब उन्होंने सेना की नौकरी जॉइन की और सऊदी अरब के सैनिकों के सम्पर्क में आई। और फिर उन्होंने साल 2011 में इस्लाम अपना लिया । अपनी जिंदगी में घटित एक दुखद घटना और कुरआन और हदीस (पैगम्बर मुहम्मद सल्ल. की शिक्षाओं) का अध्ययन के बाद उन्हें अपनी जिंदगी का मकसद इस्लाम में ही नजर आया।

अस्सलामु अलैकुम
मेरा नाम विक्टोरिया एरिंगटोन (अब आयशा) है। मैं जॉर्जिया में पैदा हुई और गैर धार्मिक ईसाइ परिवार में पली-बढ़ी। मैंने गैर धार्मिक इसलिए कहा है क्योंकि हम अक्सर चर्च नहीं जाते थे और मेरे माता-पिता शराबी और स्मोकर थे। मेरे माता-पिता के बीच उस वक्त तलाक हो गया था जब मैं युवा थी। तलाक के बाद मेरी मां ने चार बार विवाह किया। मेरे पिता अक्सर काम के सिलसिले में सफर पर ही रहते थे और वे घर पर कम ही रुकते थे। इन हालात से आप अंदाजा लगा सकते हैं कि मेरी पारिवारिक जिंदगी सामान्य नहीं रही।

ईसाइयत से जुड़े कई सवाल अक्सर मेरे दिमाग में घूमते रहते थे। जैसा कि ईसाइ मानते हैं कि ईसा मसीह पूरे इंसानों के गुनाहों की खातिर सूली पर चढ़े हैं। मैं सवाल उठाती थी अगर हमें ईसा मसीह के सूली पर चढऩे की वजह से पहले ही अपने गुनाहों की माफी मिल गई है तो फिर हमें नेक काम करने की आखिर जरूरत क्यों है? मनाही के बावजूद आखिर हम सुअर का गोश्त क्यों खाते हैं? आखिर एक ही वक्त में ईश्वर, ईश्वर और ईसा कैसे हो सकता है? यानी एक ईश्वर दो रूपों में वह भी एक ही वक्त में! ऐसे कई सवाल अक्सर मेरे जहन में उठते थे। मैं इन सवालों का जवाब चाहती थी लेकिन न परिवारवालों के पास और न ही पादरियों के पास मेरे इन सवालों का जवाब था। मेरे यह सवाल अनुत्तरित ही रहे।

साल 2002 में मैंने सेना की नौकरी जॉइन की और टे्रनिंग के दौरान मैं कई मुस्लिम सऊदी अरब के सैनिकों के सम्पर्क में आई। यह इस्लाम से मेरा पहला परिचय था। हालांकि उस वक्त धर्म को लेकर मैं संजीदा नहीं थी। दरअसल मेरी जिंदगी में एक अहम मोड़ 2010 में आया जब मुझे एक गंभीर पारिवारिक संकट का सामना करना पड़ा क्योंकि मेरे ईसाइ पति ने मुझे तलाक दे दिया था। इसी बीच मेरी मुलाकात एक शख्स से हुई जो मुस्लिम था। मैंने उस मुुस्लिम शख्स की जिंदगी के विभिन्न पहलुओं और गतिविधियों पर गौर किया। उससे इस्लाम से जुड़े कई सवाल पर सवाल किए। उस मुस्लिम शख्स ने मुझ पर कभी भी इस्लाम नहीं थोपा बल्कि मुझसे कहा कि आप फलां-फलां किताबें पढें। उसने मुझो इस्लाम पर कई किताबें और कुरआन दी। मैंने पूरा कुरआन पढ़ डाला और बहुत कुछ बुखारी (इसमें मुहम्मद सल्ल. की शिक्षाएं संकलित हैं।) भी। इस्लाम पर और भी अनगिनत किताबें मैने पढ़ डाली। मैंने अपने हर एक सवाल का जवाब इस्लाम में पाया। मैंने इस्लाम में जिंदगी से जुड़े हर पहलू पर रोशनी पाई। मुझे हर एक मसले का समाधान इस्लाम में नजर आया। अब मैं जान चुकी थी कि यही एकमात्र रास्ता है जो मुझे सिखाता है कि मुझो अपनी जिंदगी किस तरह गुजारनी चाहिए।

मुझे अपने सवालों के जवाब चाहिए थे। मैं एक गाइड बुक चाहती थी जिसके मुताबिक मैं अपनी जिंदगी गुजार सकूं, और आखिर इसी के चलते मैनें दिसम्बर 2011 में इस्लाम अपना लिया।

यूरोप आज जिस साइंस पर फख्र कर रहा है, वह इस्लामी मुफक्क्रीन की देन है. यह देन उस किताबुल्ल्लाह की है, जिसे मुसलमानों ने गंवा दिया और सिर्फ कुरान “ममात” व “आखरत” मुसलमानों के हिस्से में रह गया, जबकि जीवन व नेचर पर दस्तयाब कुरानी तालीमात को यूरोप ने ले लिया. ब्रिटिश रिसर्च ने इस सच्चाई का इज़हार किया है कि बारहवीं सदी तक यूरोप के तमाम जय्यद और पढ़े लिखे लोगों ने न सिर्फ कुरानी अहकाम का मुताला किया बल्कि वह करीब करीब मुसलमान जैसे मज़बूत अकीदा रखने वाले हो गए थे. इसी मजबूत अकीदे की बुनियाद पर उन्होंने नेचर का मुताला किया और वहदानियत में यकीन पैदा कर लिया.

‘जेन्स’ एक काबिल माहिरे तबियात साइंटिस्ट था, उस ने यह कहा था कि “मज़हब इंसानी ज़िन्दगी की नागुज़ेर ज़रूरत है, क्यूंकि अल्लाह पर इमान लाये बगैर साइंस के बुनयादी मसाइल हल ही नही हो सकते”. माहिरे अम्र्नियात Jeans Bridge ने तो यहाँ तक मान लिया कि “मज़हब और रूहानियत के इम्त्जाज से अकीदा व अमल के एक मुत्वाज़न निज़ाम की तशकील पर इस्लाम से बेहतर कोई मज़हब नही. मुसलमानों ने कुरान से रहनुमाई हासिल करके अहम् साइंसी एजादात को अंजाम दिया, क्यूंकि साइंस सच्चाई और हकीकत की तलाश करती है और कुरान सच्चाई और हकीक़त को अपना कर अल्लाह तक पहुँचने का रास्ता बताता है, इस लिए मुस्लिम साइंसदानों ने सच्चाई की तलाश में बेशुमार “सच” को पा लिया और मज़ीद हुसुल्याबी केलिए बहुत से एजादात को अंजाम दिया,मगर यूरौप ने अरबी तसानीफ़ का लातिनी में तर्जुमा कराया और फिर उसे अपने नामों से जोड़ दिया. बहुत से मुस्लिम मुस्न्न्फीन के नामों को छुपाने के लिए उन के नामों को लातिनी शक्ल दे दी.


जैसे :
1. जाबिर बिन हय्यान का नाम “गेबर” करके उसको यूरौप का इल्म केमियां का बावा आदम करार दे दिया गया.
2. इब्न मजा अबू बकर के नाम को बदल कर लातिनी शक्ल “आवेम पाके” कर दी गई.
3. इब्न दाउद के नाम की लातिनी शकल “आवेन देन्थ” कर दी गई.
4. अबू मुहम्मद नसर (फाराबी) के नाम की लातिनी शक्ल “फाराब्युस” कर दी गई .
5. अबू अब्बास अहमद (अल्फर्गानी) के नाम की लातिनी शक्ल “अल फर्गांस” कर दी गई.
6. अल्ख्लील के नाम की लातिनी शक्ल “अल्कली” कर दी गई.
7. इब्न रशद के नाम की लातिनी शक्ल “ऐवेरोस” कर दी गई.
8. अब्दुल्लाह इब्न बतानी के नाम की लातिनी शक्ल “बाता गेनोस” कर दी गई.
इस तरह से बे शुमार मुस्लिम, साइंसदान ऐसे हैं जिन के नाम को बदल कर उन के साइंसी एजादात और कारनामों को अपने नाम कर लिया गया.
मुस्लिम साइंसदानों ने रियाजी, फल्कियात, केमिया,  टेक्नोलोजी, जुगराफिया, और तब वगैरह में बेशुमार और काबिले ज़िक्र तहकीकात का काम अंजाम दिया है और मुस्लिम तेरहवीं चौदहवी और पन्द्रहवीं सदी तक लगातार बड़े बड़े साइंसदां पैदा करते रहे.

जिन में से कुछ के नाम यह हैं. जाबिर बिन हय्यान, अल्कुंदी, अल्ख्वार्ज़ी, अल राज़ी, साबित बिन कर्रा, अल्बिनानी, हसनैन बिन इसहाक अल्फाराबी, इब्राहीम इब्न सनान, अल मसूदी, इब्न सीना, इब्न युनुस, अल्कर्खी, इब्न अल हैश्म, अली इब्न इसा, अल बैरूनी,  अत्तिबरी, अबुल्वही, अली इब्न अब्बास, अबुल कासिम, इब्न ज्ज़ार, अल गजाली,  अल ज़र्काली, उमर खय्याम वगैरह. उन माए नाज़ मुस्लिम साइंसदानो के नाम बहुत ही कम मुद्दत में ही यानी 750 से 1100 ई० के दरमियान ही साइंसी दुनियां में सितारों की तरह जगमगा उठे और पूरी दुनियां ने देखा कि किस तरह मुस्लिम साइंटिस्ट ने कुरान करीम से हिदायत पा कर निज़ामे कुदरत के राजों को जान्ने में कमियाबी हासिल की .

मगर निहायत अफसोसनाक है कि यूरोप के अदब ने हामीले कुरान लोगों के साइंसी एहससान को बड़े बेहतर तरीके से नज़र अंदाज़ करने की तरकीब निकाल ली. न सिर्फ बड़े साइंसी एजादात को,बल्की मुसलमानी ज़िन्दगी की तौर तरीकों को, आदाब व रसम, खुश एत्वारियों, पाकीज़ा तर्ज़े मुआश्र्त, जाती सफाई और सिहत वगैरह के मैदानों में मुसलमानों की हुसुल्याबी और एजादात को बुरी तरह से मिटा दिया या फिर अपने नाम से मंसूब करके दुनियां के सामने सुर्खरू होने की नापाक साजिश की. इस तरह मुसलमानों की साइंसी खिदमात और रिसर्च और एजदात पर पर्दा डाल दिया गया, जबकि यह बात तारिख के पन्नो में दर्ज है,
हवाला जात:
1. कुरान साइंस और तहजीब व तमद्दुन- डॉक्टर हाफिज हक्कानी मियाँ कादिरी
2. कुरान और जदीद साइंस – डॉक्टर हशमत जाह
3. मुहाज्राते क़ुरानी- डॉक्टर महमूद अहमद गाज़ी

सोशल डायरी ब्यूरो से Copyright Content
‘‘...हमारा शूद्र होना एक भयंकर रोग है, यह कैंसर जैसा है। यह अत्यंत पुरानी शिकायत है। इसकी केवल एक ही दवा है, और वह है इस्लाम। इसकी कोई दूसरी दवा नहीं है। अन्यथा हम इसे झेलेंगे, इसे भूलने के लिए नींद की गोलियाँ लेंगे या इसे दबा कर एक बदबूदार लाश की तरह ढोते रहेंगे। इस रोग को दूर करने के लिए उठ खड़े हों और इन्सानों की तरह सम्मानपूर्वक आगे बढ़ें कि केवल इस्लाम ही एक रास्ता है…।’’

‘‘…अरबी भाषा में इस्लाम का अर्थ है शान्ति, आत्म-समर्पण या निष्ठापूर्ण भक्ति। इस्लाम का मतलब है सार्वजनिक भाईचारा, बस यही इस्लाम है। सौ या दो सौ वर्ष पुराना तमिल शब्द-कोष देखें। तमिल भाषा में कदावुल देवता (Kadavul) का अर्थ है एक ईश्वर, निराकार, शान्ति, एकता, आध्यात्मिक समर्पण एवं भक्ति। ‘कदावुल’ (Kadavul) द्रविड़ शब्द है। अंग्रेज़ी भाषा का शब्द गॉड (God) अरबी भाषा में ‘अल्लाह’ है। ….भारतीय मुस्लिम इस्लाम की स्थापना करने वाले नहीं बल्कि उसका एक अंश हैं…।’’

‘‘…मलायाली मोपले (Malayali Mopillas), मिस्री, जापानी, और जर्मन मुस्लिम भी इस्लाम का अंश हैं। मुसलमान एक बड़ा गिरोह है। इन में अफ़्रीक़ी, हब्शी और नेग्रो मुस्लिम भी है। इन सारे लोगों के लिए अल्लाह एक ही है, जिसका न कोई आकार है, न उस जैसा कोई और है, उसके न पत्नी है और न बच्चे, और न ही उसे खाने-पीने की आवश्यकता है।’’

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‘‘…जन्मजात समानता, समान अधिकार, अनुशासन इस्लाम के गुण हैं। अन्तर के कारण यदि हैं तो वे वातावरण, प्रजातियाँ और समय हैं। यही कारण है कि संसार में बसने वाले लगभग साठ करोड़ मुस्लिम एक-दूसरे के लिए जन्मजात भाईचारे की भावना रखते हैं। अतः जगत इस्लाम का विचार आते ही थरथरा उठता है…।’’

‘‘…इस्लाम की स्थापना क्यों हुई? इसकी स्थापना अनेकेश्वरवाद और जन्मजात असमानताओं को मिटाने के लिए और ‘एक ईश्वर, एक इन्सान’ के सिद्धांत को लागू करने के लिए हुई, जिसमें किसी अंधविश्वास या मूर्ति-पूजा की गुंजाइश नहीं है। इस्लाम इन्सान को विवेकपूर्ण जीवन व्यतीत करने का मार्ग दिखाता है…।’’

‘‘…इस्लाम की स्थापना बहुदेववाद और जन्म के आधार पर विषमता को समाप्त करने के लिए हुई थी। ‘एक ईश्वर और एक मानवजाति’ के सिद्धांत को स्थापित करने के लिए हुई थी; सारे अंधविश्वासों और मूर्ति पूजा को ख़त्म करने के लिए और युक्ति-संगत, बुद्धिपूर्ण (Rational) जीवन जीने के लिए नेतृत्व प्रदान करने के लिए इसकी स्थापना हुई थी…।’’
 ‘द वे ऑफ सैल्वेशन’ पृ॰ 13,14,21 से

नफरत के इस दौर में सच्चाई का साथ देने वाले बहुत सारे लोग है. झूठ फरेब कितना भी ताकतवर क्यों ना हो आखिर सच उजागर ही होता है. मनोज कुमार गैरमुस्लिम होते हुए भी साम्प्रदायिकता को जोरदार तमाचा लगाते हुए इस्लाम विरोधियो को आईना दिखाया. सच को सच लिखा. हम आपके लिए उनके यह विचार प्रकाशित कर रहे है.

तो फिर इस्लाम एक बुरा धर्म हैं!!!
जब से इस्लाम धर्म दुनिया में आया हैं , तब से ही इस्लाम को बुरा कहने वाले भी पैदा हो गये हैं।
इस्लाम धर्म से चिढने वालों की हर वक़्त यही कोशिश रहती हैं कि किसी न किसी तरीके से इस्लाम को बदनाम किया जाए।
और वे इस्लाम धर्म के प्रति अलग अलग प्रकार की भ्रामक बातें फैलाते रहते हैं।आखिरकार वे इस्लाम से चिढते क्यों हैं? जबकि
✅ इस्लाम कहता है कि हमें एक ईश्वर को पुजना चाहिए जो हम सबका मालिक हैं। जिसका कोई रंग हैं ना कोई रूप हैं। जिसे किसी ने नहीं बनाया पर उसने हर चीज़ को बनाया। अगर ये बात बुरी हैं तो फिर इस्लाम एक बुरा धर्म हैं।
✅ इस्लाम कहता है कि तुम्हारी मेहनत की कमाई से 2.5% गरीबों को देना हर हालत में जरूरी हैं। ऐसी शिक्षा देना गलत है तो फिर इस्लाम एक बुरा धर्म हैं।
✅ इस्लाम कहता है कि तुम लोगों की मदद करोगे तो खुदा तुम्हारी मदद करेंगा। और जो कुछ भी तुम अपने लिए चाहते हो वही सबके लिए भी चाहो तो ही एक सच्चे मुसलमान बन सकते हो। ऐसी शिक्षा देना गलत है तो फिर इस्लाम एक बुरा धर्म हैं।
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✅ इस्लाम कहता है कि तुम एक महीने तक सुबह से शाम भूखे और प्यासे रहो ताकि तुम्हें एहसास हो सकें कि भूख और प्यास क्या होती हैं। अगर ऐसी बात सिखाना गलत हैं तो फिर इस्लाम एक बुरा धर्म हैं।
✅ इस्लाम कहता है कि तुम्हारे घर बेटी पैदा हो तो दुखी मत होना क्योंकि बेटियाँ तो खुदा की रहमत (इनाम) हैं। और जो व्यक्ति अपनी मेहनत की कमाई से अपनी बेटी की परवरिश करें और उसकी अच्छे घर में शादी कराएँ तो वो जन्नत (स्वर्ग) में जायेगा। ऐसी शिक्षा देना गलत है तो फिर इस्लाम एक बुरा धर्म हैं।
✅ इस्लाम कहता है कि सबसे अच्छा आदमी वो हैं जो औरतों के साथ सबसे अच्छा सुलूक करता हैं। अगर ये बुरी बात है तो फिर इस्लाम एक बुरा धर्म हैं।
✅ इस्लाम कहता है कि विधवाएं मनहूस नहीं होती इन्हें भी एक बेहतर जीवन जीने का पूरा अधिकार है। इसलिए विधवाओ और उनके बच्चों को अपनाओ। अगर विधवाओ को अधिकार देना गलत है तो फिर इस्लाम एक बुरा धर्म हैं।
✅ इस्लाम कहता है कि ऐ मुसलमानों जब नमाज पढ़ो तो एक दूसरे से कन्धे से कन्धा मिलाकर खड़े रहो क्योंकि तुम सब आपस मे बराबर हो तुम में से कोई छोटा या बड़ा नहीं हैं। समानता की शिक्षा देना गलत है तो फिर इस्लाम एक बुरा धर्म हैं।
✅ इस्लाम कहता है कि ऐ मुसलमानों अपने पड़ोसियों से अच्छा बर्ताव करो चाहे तुम उन्हें जानते हो या न जानते हो। और खुद खाने से पहले अपने पड़ोसी को खाना खिलाओ। पड़ोसी की मदद करना गलत है तो फिर इस्लाम एक बुरा धर्म हैं।


✅ इस्लाम कहता है कि शराब और जुआ सारी बुराइयों की जड़ है। इनसे अपने आप को दूर रखे। अगर समाज में मौजूद बुराइयों को समाप्त करना बुरी बात हैं तो फिर इस्लाम एक बुरा धर्म हैं।
✅ इस्लाम कहता है कि मजदूर का पसीना सूखने से पहले पहले उसकी मजदूरी दे दो। और कभी किसी गरीब और अनाथ की बद्दुआ न लेना नहीं तो बरबाद हो जाओगे। अगर ये बुरी बात है तो फिर इस्लाम एक बुरा धर्म हैं।
✅ इस्लाम कहता है कि अपने आप को जलन (ईर्ष्या) से दूर रखो क्योंकि ये तुम्हारे (नेकियों) अच्छे कामों को ऐसे बरबाद कर देती हैं जैसे दीमक लकड़ी को। ऐसी शिक्षा देना गलत है तो फिर इस्लाम एक बुरा धर्म हैं।
✅ इस्लाम कहता है कि बुजुर्ग व्यक्ति का सम्मान करना मानों खुदा का सम्मान करने जैसा हैं। अगर तुम जन्नत (स्वर्ग) में जाना चाहते हो तो अपने मा बाप को हर हाल में खुश रखो। ऐसी शिक्षा देना गलत है तो फिर इस्लाम एक बुरा धर्म हैं।
✅ इस्लाम कहता है कि सबसे बड़ा जिहाद ये है कि कोई व्यक्ति अपनी इच्छाओं को मारे और अपने आप से लड़े। ऐसी शिक्षा देना गलत है तो फिर इस्लाम एक बुरा धर्म हैं।
✅ इस्लाम कहता है कि अगर खुश रहना चाहते हो तो किसी अमीर को मत देखो बल्कि गरीब को देखो तो खुश रहोगे। और लोगों से अच्छा बर्ताव करना सबसे बड़ा पुण्य का काम हैं। अगर ये बुरी बात है तो फिर इस्लाम एक बुरा धर्म हैं।
✅ इस्लाम कहता है कि हमेशा नैतिकता और सच्चाई के रास्ते पर चलो। बोलों तो सच बोलों, वादा करो तो निभाओ और कभी किसी का दिल मत दुखाओ। ऐसी शिक्षा देना गलत है तो फिर इस्लाम एक बुरा धर्म हैं।
✅ इस्लाम कहता है कि सबसे बुरी दावत वह हैं जिसमें अमीरों को तो बुलाया जाता हैं परन्तु गरीबों को नहीं बुलाया जाता हैं।
✅पानी को ज़रूरत तक ही इस्तेमाल(उपयोग) करना। और बिना वजह पानी का दुरूपयोग करना गुनाह(पाप)। ऐसी शिक्षा देना गलत है तो फिर इस्लाम एक बुरा धर्म हैं।
✅रास्ते में अगर कोई तक़लीफ़ देने वाली वस्तु(पत्थर,कील,) होतो उसे किनारे करना जिससे दुसरो को पीड़ा न हो। ऐसी शिक्षा देना गलत है तो फिर इस्लाम एक बुरा धर्म हैं।
 ✅इस्लाम कहता है कि अन्जान महिलाओ पर नज़र पड़े तो आँखें नीची कर लो क्योंकी गैर महिलाओ को बुरी नजर से देखना गुनाह(पाप) है। ऐसी शिक्षा देना गलत है तो फिर इस्लाम एक बुरा घर्म है। ??? आप ही सोचिये के इस्लाम बुरा धर्म है या उसे बुरा केहने वाले।। कुरान सिर्फ मूसलमांन की धार्मिक किताब नही है। कुरान तो हिन्दुस्तान ही नही दुनिया के हर इंसान के लिए, हर समाज के लीये सही रास्ते पे चलने का ओर एक बेहतरीन जिंदगी जीने का रास्ता है।। हर इंसान को कुरान पढ़ना चाहिए ओर उसे समझना चाहिए ।।
-मनोज कुमार All India Youth federation - AIYF
President East Delhi है.

फिलहाल सोशल मीडिया पर एक त्सुनामी आया है उस त्सुनामी का नाम है तैमूर, हाल ही में एक बच्चे को करीना कपूर और सैफ अली खान इस दंपत्ति ने जन्म दिया. शादी उन्होंने की, बच्चा उन्होंने पैदा किया, नाम उन्होंने रखा, लेकिन पेट में दर्द भक्तो के हो रहा है. यह बात सच है के नाम रखने से कोई वैसा नहीं बन सकता जिसका नाम रखा गया हो. इस विषय पर सोशल मीडिया पर बवाल मचा हुआ है. कोई तीखा जवाब दे रहा है तो कोई कॉमेडी कर रहा है, तो कोई सवाल पूछ रहा है.

जिस तरह से महापुरुष, देवी-देवता, रूशी-मुनियों के नाम करोडो लोगो ने रखे है लेकिन कोई महापुरुष बना ना कोई रूशी बना ना कोई भगवान् देवी देवता बना. फिर तैमुर नाम पर इतना बवाल क्यों ? बस यह सिर्फ साम्प्रदायिकता है. वरना निर्भया के बलात्कारी के नाम के लोगो पर भी आपत्ति जताई जाती, लेकिन ऐसा कुछ नहीं होता. - संपादक

मुंबई के एल्फ़िंस्टन ब्रिज हादसे को लेकर मनसे प्रमुख राज ठाकरे ने मोदी सरकार पर तीखा हमला किया है. उन्होंने मोदी सरकार की तुलना आतंकियों से करते हुए कहा कि हमें पाकिस्तान जैसे दुश्मनों या आतंकियों की जरूरत ही क्या है? ऐसा लगता है कि लोगों की जान लेने के लिए हमारी अपनी रेलवे ही काफी है.

इस दौरान उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को कटघरें में खडा करते हुए कहा कि मोदी सरकार झूटे वादे करके ही सत्ता में आई हैं और अब उनकी पोल खुल गई है. ठाकरे ने कहा की, कितना झूठ बोलता हैं इस देश का प्रधानमंत्री. इतना झूठ बोलने वाला प्रधानमंत्री आज तक उन्होने नहीं देखा.

एएनआई से बात करते हुए ठाकरे ने कहा कि मुंबई लोकल से जुडे मुद्दे की लिस्ट को 5 अक्टूबर तक रेलवे तक सौंप देंगे. इसके बाद अगर समय पर उन्होंने स्थिति को सही नहीं किया, तो हम अपने हिसाब से काम करेंगे. उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि जब तक सभी मुंबई में रेल में सफर करने वाले यात्रियों के मुद्दे नहीं सुलझ जाते, वह बुलेट ट्रेन परियोजना को शुरू नहीं होने देंगे.

ठाकरे ने कहा, “मैं बुलेट ट्रेन परियोजना के लिए एक ईंट भी नहीं लगाने दूंगा. पहले मुंबई के यात्रियों की बुनियादी समस्याएं सुलझाइए. मोदी चाहें तो गुजरात में इसका निर्माण करा लें. अगर वह बल प्रयोग करेंगे, तो हम भी जबाव देंगे.”

उन्होंने दावा किया कि बुलेट ट्रेन परियोजना को आगे बढ़ाने के लिए ही सुरेश प्रभु के स्थान पर पीयूष गोयल को रेल मंत्री बनाया गया है। उन्होंने कहा, “प्रभु अच्छे थे, गोयल किसी काम के नहीं हैं।”
(कोहराम से)

अमेरिकन युआन रिडली
ट्विन टावर अटैक के बाद एक बात अमेरिकन योरोपियन मीडिया द्वारा प्रिप्लांड तरीके से वाइरल की गई कि हवाई जहाज़ के टकराने से ठीक पहले मुहम्मद अता ने कहा कि जश्न मनाओ साथियो ... हमने कुरान को अपनाया और अब हम जन्नत जाने वाले हैं । निशाना सीधा कुरान को लेकर प्रोपेगेंडा करने का था एक पादरी तो इतना जज़्बाती हो गया कि उसने कुरान को सार्वजनिक जलाने की घोषणा करदी पादरी और मीडिया के इस प्रोपेगेंडा ने योरोप में कुरान को लेकर इतनी जिज्ञासा पैदा करदी की योरोप में कुरान की पूर्ति होना मुश्किल हो गयी ।

प्रिंट से ज्यादा ऑर्डर थे , और बेश्तर महिलाओं की संख्या ज्यादा थी जो कुरान खरीदने के लिए कई दिनों तक बुक स्टोर के चक्कर लगाती रहीं  और जब कुरान को इस हद तक पढ़ा गया कि आज योरोप में यह संकट पैदा हो गया है कि आख़िर कैसे रोकें युवाओं को मुसलमान होने से धर्म परिवर्तन कर मुसलमान होने की जैसे योरोप में उसी वक़्त से हवा चल रही है मैं शुक्रिया अदा करती हूँ फासिज़्म का , सैफरोनिज़्म का , संघ का , अदालतों का और सरकार का और सबसे बढ़ कर मीडिया का मैं दिली साधुवाद देती हूँ मीडिया को जो कि एक नई सुबह, नई बेदारी नए इंकलाब के लिए मुसलमानो को ज़मीन तैयार करके दे रही है साधुवाद देती हूँ कि मुस्लिम कौम को टीवी पर लगातार प्रसारण देते रहने के लिए ब्राह्मणवाद हार्ड है पर स्मार्ट नही है ...

जो स्मार्ट होता तो दुनिया का सबसे बड़ा धर्म परिवर्तन का गहवारा भारत न बनता ... हालांकि अपनी कोशिशों से ब्रह्मानिज़्म ने इस परिवर्तन को रोकने की कोशिश की होगी . ... लेकिन यह इस्लाम है मेरी जान , प्रतिकूल ही तो इस्लाम के अनुकूल है इतिहास गवाह है. 9/11 के बाद 10 महीने में 34 हज़ार युवाओं ने इस्लाम को अपनाया अकेले अमेरिका में 9/11 के बाद 9 महीने में 28 हज़ार युवाओं ने इस्लाम को स्वीकार किया यूरोप में न तलवार ,न तोप, तो क्या ??

Sawal:-Hazrat Moosa (Alaihissalam) Ke “Asa” Mubarak Ka Kya Naam Tha?
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Jawab:-Aap Ke “Asa” Mubarak Ke Nam Se 3 Aqwal Hai…
1.Nab’a.
2.Maasha.
3.Illiq.
Ye Asa Mubarak “Jannat” Ke Darakht (Ped) “Aas” Ki Lakdi Ka Tha.
Ye Asa Mubarak Hazrat Adam (Alaihissalam) Jannat Se Laaye The,Unse Muntaqil Hota Huwa,Hazrat Shoeb (Alaihissalam) Tak Pahuncha,Aur Aap Ne Hazrat Moosa Ko Bakriya’n Charane ke Liye Diya tha.
Is Asa Ki Lambayi Aap Ke Qad ke Barabar Thi.
{Ibn-e Kaseer,Parah-16-Ruku10}

Note: Asa “Lakdi Ke Dande” Ko Kahte Hai,Jis Se Log Sahara Leke Chalte Hai.

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Sawal:-Hazrat Moosa (Alaihissalam) Ke Asa Mubarak Me Kya Kya Khubiya Thi?
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Jawab:-Aap Ke Asa Mubarak Ki Khubiya’n Is Tarah Riwayato Me Mazkoor Hain…
1. Is Asa Mubarak Ke Upar Ki 2 Shakhen Thi,Jo Tareek (Andhere) Me Dono Taraf Jalti Thi.
2.Aap Jab Safar Me Hote To Ye “Asa” Aap Se Baaten Karte Chalta Tha.
3.Aap Ko Jab Bhook Lagti,Aur Koi Cheez Khaane Peene ko Naa Hoti To, Asa Ko Zameen Par Maarte,Usse Ek Din Ka Khana Nikal Aata Tha.
4.Jab Aap Ko Piyas Lagti To Aap Zameen Par Nasab Karte To Usse Paani Ubalna Shuru Ho Jaata Tha.
5.Jab “Kuwe’n” Se Paani Kheechne ki Naubat Aati To Ye Asa Dol Ka Kaam Deta,Aur Itna Lamba Hojata Jitni Kuwen Ki Gaihrayi Hoti,Upar Ki 2 Shaakhe’n Dol Ki Tarah Banjati Thi.
5.Jab Aap Ko “Phal” Khaane Ki Khuwahish Hoti To Us Asa ko Zameen Par Dafan Kardete,Ye Asa Darakht (Ped) Banjaata,Patte Nikal Aate,Fir Phal Aajate The.

6. Jab Koi Dushman Saamne Aata To Ye “Asa” Khud Ba Khud Us se Ladta,Aur Galib Aajata Tha.
{Nuzhatul Majalis,Safa-No.23}


" POST BY MOHSIN "

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