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Articles by "SOCIAL"

नफ़रत के बाजार में मोहब्बत का फूल बांटती एक खूबसूरत घटना
उत्तर प्रदेश के बागपत जिले में गंगा-जमनी तहजीब और इंसानियत की मिसाल देखने को मिली है ! जिले के अब्दुलपुर गांव में हिंदुओं ने गरीब मुस्लिम लड़की का निकाह संपन्न कराया , इतना ही नही एक ब्राह्मण दंपति ने युवती का कन्यादान भी किया ! जानकारी के अनुसार अब्दुलपुर गांव में रहने वाले बाबू कुछ सालों से लापता हैं और उनके घर की आर्थिक स्थिति भी खराब है, जिसकी वजह से बाबू की बेटी गुलसफा की शादी कराने के लिए गांव के ही लोगों ने जिम्मेदारी ली ! 

गांव के सभी हिंदुओं ने रुपये इकट्ठे कर गुलसफा का निकाह गाजियाबाद जिले के लोनी कस्बे में रहने वाले अय्यूब के साथ बड़े ही जोर -शोर से कराया ,गांव के ही रहने वाले ब्राह्मण दम्पति गंगेश्वर और उनकी पत्नी कांता ने गुलशफा का कन्यादान भी किया ! बारात की आवभगत में ग्राम प्रधान समेत गांव के तमाम हिंदू जुट गए और बारातियों की खातिरदारी की !

नफरत फैलाने वाले विशेष वर्ग के मुंह पर करारा तमाचा है यह घटना , #जी_हां !

भारत के शीर्ष मुस्लिम स्वतंत्रता सेनानी जिन्हें साजिशन इतिहास से छुपाया गया ।। Muslim freedom fighter



ये देखिये मुसलमानों का देशप्रेम ।।  हीरे जवाहरात ना चाहत की बात कर..
हीरे जवाहरात ना चाहत की बात कर, मेरे भारत की बात कर ।


यूरोप आज जिस साइंस पर फख्र कर रहा है, वह इस्लामी मुफक्क्रीन की देन है. यह देन उस किताबुल्ल्लाह की है, जिसे मुसलमानों ने गंवा दिया और सिर्फ कुरान “ममात” व “आखरत” मुसलमानों के हिस्से में रह गया, जबकि जीवन व नेचर पर दस्तयाब कुरानी तालीमात को यूरोप ने ले लिया. ब्रिटिश रिसर्च ने इस सच्चाई का इज़हार किया है कि बारहवीं सदी तक यूरोप के तमाम जय्यद और पढ़े लिखे लोगों ने न सिर्फ कुरानी अहकाम का मुताला किया बल्कि वह करीब करीब मुसलमान जैसे मज़बूत अकीदा रखने वाले हो गए थे. इसी मजबूत अकीदे की बुनियाद पर उन्होंने नेचर का मुताला किया और वहदानियत में यकीन पैदा कर लिया.

‘जेन्स’ एक काबिल माहिरे तबियात साइंटिस्ट था, उस ने यह कहा था कि “मज़हब इंसानी ज़िन्दगी की नागुज़ेर ज़रूरत है, क्यूंकि अल्लाह पर इमान लाये बगैर साइंस के बुनयादी मसाइल हल ही नही हो सकते”. माहिरे अम्र्नियात Jeans Bridge ने तो यहाँ तक मान लिया कि “मज़हब और रूहानियत के इम्त्जाज से अकीदा व अमल के एक मुत्वाज़न निज़ाम की तशकील पर इस्लाम से बेहतर कोई मज़हब नही. मुसलमानों ने कुरान से रहनुमाई हासिल करके अहम् साइंसी एजादात को अंजाम दिया, क्यूंकि साइंस सच्चाई और हकीकत की तलाश करती है और कुरान सच्चाई और हकीक़त को अपना कर अल्लाह तक पहुँचने का रास्ता बताता है, इस लिए मुस्लिम साइंसदानों ने सच्चाई की तलाश में बेशुमार “सच” को पा लिया और मज़ीद हुसुल्याबी केलिए बहुत से एजादात को अंजाम दिया,मगर यूरौप ने अरबी तसानीफ़ का लातिनी में तर्जुमा कराया और फिर उसे अपने नामों से जोड़ दिया. बहुत से मुस्लिम मुस्न्न्फीन के नामों को छुपाने के लिए उन के नामों को लातिनी शक्ल दे दी.


जैसे :
1. जाबिर बिन हय्यान का नाम “गेबर” करके उसको यूरौप का इल्म केमियां का बावा आदम करार दे दिया गया.
2. इब्न मजा अबू बकर के नाम को बदल कर लातिनी शक्ल “आवेम पाके” कर दी गई.
3. इब्न दाउद के नाम की लातिनी शकल “आवेन देन्थ” कर दी गई.
4. अबू मुहम्मद नसर (फाराबी) के नाम की लातिनी शक्ल “फाराब्युस” कर दी गई .
5. अबू अब्बास अहमद (अल्फर्गानी) के नाम की लातिनी शक्ल “अल फर्गांस” कर दी गई.
6. अल्ख्लील के नाम की लातिनी शक्ल “अल्कली” कर दी गई.
7. इब्न रशद के नाम की लातिनी शक्ल “ऐवेरोस” कर दी गई.
8. अब्दुल्लाह इब्न बतानी के नाम की लातिनी शक्ल “बाता गेनोस” कर दी गई.
इस तरह से बे शुमार मुस्लिम, साइंसदान ऐसे हैं जिन के नाम को बदल कर उन के साइंसी एजादात और कारनामों को अपने नाम कर लिया गया.
मुस्लिम साइंसदानों ने रियाजी, फल्कियात, केमिया,  टेक्नोलोजी, जुगराफिया, और तब वगैरह में बेशुमार और काबिले ज़िक्र तहकीकात का काम अंजाम दिया है और मुस्लिम तेरहवीं चौदहवी और पन्द्रहवीं सदी तक लगातार बड़े बड़े साइंसदां पैदा करते रहे.

जिन में से कुछ के नाम यह हैं. जाबिर बिन हय्यान, अल्कुंदी, अल्ख्वार्ज़ी, अल राज़ी, साबित बिन कर्रा, अल्बिनानी, हसनैन बिन इसहाक अल्फाराबी, इब्राहीम इब्न सनान, अल मसूदी, इब्न सीना, इब्न युनुस, अल्कर्खी, इब्न अल हैश्म, अली इब्न इसा, अल बैरूनी,  अत्तिबरी, अबुल्वही, अली इब्न अब्बास, अबुल कासिम, इब्न ज्ज़ार, अल गजाली,  अल ज़र्काली, उमर खय्याम वगैरह. उन माए नाज़ मुस्लिम साइंसदानो के नाम बहुत ही कम मुद्दत में ही यानी 750 से 1100 ई० के दरमियान ही साइंसी दुनियां में सितारों की तरह जगमगा उठे और पूरी दुनियां ने देखा कि किस तरह मुस्लिम साइंटिस्ट ने कुरान करीम से हिदायत पा कर निज़ामे कुदरत के राजों को जान्ने में कमियाबी हासिल की .

मगर निहायत अफसोसनाक है कि यूरोप के अदब ने हामीले कुरान लोगों के साइंसी एहससान को बड़े बेहतर तरीके से नज़र अंदाज़ करने की तरकीब निकाल ली. न सिर्फ बड़े साइंसी एजादात को,बल्की मुसलमानी ज़िन्दगी की तौर तरीकों को, आदाब व रसम, खुश एत्वारियों, पाकीज़ा तर्ज़े मुआश्र्त, जाती सफाई और सिहत वगैरह के मैदानों में मुसलमानों की हुसुल्याबी और एजादात को बुरी तरह से मिटा दिया या फिर अपने नाम से मंसूब करके दुनियां के सामने सुर्खरू होने की नापाक साजिश की. इस तरह मुसलमानों की साइंसी खिदमात और रिसर्च और एजदात पर पर्दा डाल दिया गया, जबकि यह बात तारिख के पन्नो में दर्ज है,
हवाला जात:
1. कुरान साइंस और तहजीब व तमद्दुन- डॉक्टर हाफिज हक्कानी मियाँ कादिरी
2. कुरान और जदीद साइंस – डॉक्टर हशमत जाह
3. मुहाज्राते क़ुरानी- डॉक्टर महमूद अहमद गाज़ी

सोशल डायरी ब्यूरो से Copyright Content
‘‘...हमारा शूद्र होना एक भयंकर रोग है, यह कैंसर जैसा है। यह अत्यंत पुरानी शिकायत है। इसकी केवल एक ही दवा है, और वह है इस्लाम। इसकी कोई दूसरी दवा नहीं है। अन्यथा हम इसे झेलेंगे, इसे भूलने के लिए नींद की गोलियाँ लेंगे या इसे दबा कर एक बदबूदार लाश की तरह ढोते रहेंगे। इस रोग को दूर करने के लिए उठ खड़े हों और इन्सानों की तरह सम्मानपूर्वक आगे बढ़ें कि केवल इस्लाम ही एक रास्ता है…।’’

‘‘…अरबी भाषा में इस्लाम का अर्थ है शान्ति, आत्म-समर्पण या निष्ठापूर्ण भक्ति। इस्लाम का मतलब है सार्वजनिक भाईचारा, बस यही इस्लाम है। सौ या दो सौ वर्ष पुराना तमिल शब्द-कोष देखें। तमिल भाषा में कदावुल देवता (Kadavul) का अर्थ है एक ईश्वर, निराकार, शान्ति, एकता, आध्यात्मिक समर्पण एवं भक्ति। ‘कदावुल’ (Kadavul) द्रविड़ शब्द है। अंग्रेज़ी भाषा का शब्द गॉड (God) अरबी भाषा में ‘अल्लाह’ है। ….भारतीय मुस्लिम इस्लाम की स्थापना करने वाले नहीं बल्कि उसका एक अंश हैं…।’’

‘‘…मलायाली मोपले (Malayali Mopillas), मिस्री, जापानी, और जर्मन मुस्लिम भी इस्लाम का अंश हैं। मुसलमान एक बड़ा गिरोह है। इन में अफ़्रीक़ी, हब्शी और नेग्रो मुस्लिम भी है। इन सारे लोगों के लिए अल्लाह एक ही है, जिसका न कोई आकार है, न उस जैसा कोई और है, उसके न पत्नी है और न बच्चे, और न ही उसे खाने-पीने की आवश्यकता है।’’

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‘‘…जन्मजात समानता, समान अधिकार, अनुशासन इस्लाम के गुण हैं। अन्तर के कारण यदि हैं तो वे वातावरण, प्रजातियाँ और समय हैं। यही कारण है कि संसार में बसने वाले लगभग साठ करोड़ मुस्लिम एक-दूसरे के लिए जन्मजात भाईचारे की भावना रखते हैं। अतः जगत इस्लाम का विचार आते ही थरथरा उठता है…।’’

‘‘…इस्लाम की स्थापना क्यों हुई? इसकी स्थापना अनेकेश्वरवाद और जन्मजात असमानताओं को मिटाने के लिए और ‘एक ईश्वर, एक इन्सान’ के सिद्धांत को लागू करने के लिए हुई, जिसमें किसी अंधविश्वास या मूर्ति-पूजा की गुंजाइश नहीं है। इस्लाम इन्सान को विवेकपूर्ण जीवन व्यतीत करने का मार्ग दिखाता है…।’’

‘‘…इस्लाम की स्थापना बहुदेववाद और जन्म के आधार पर विषमता को समाप्त करने के लिए हुई थी। ‘एक ईश्वर और एक मानवजाति’ के सिद्धांत को स्थापित करने के लिए हुई थी; सारे अंधविश्वासों और मूर्ति पूजा को ख़त्म करने के लिए और युक्ति-संगत, बुद्धिपूर्ण (Rational) जीवन जीने के लिए नेतृत्व प्रदान करने के लिए इसकी स्थापना हुई थी…।’’
 ‘द वे ऑफ सैल्वेशन’ पृ॰ 13,14,21 से

नफरत के इस दौर में सच्चाई का साथ देने वाले बहुत सारे लोग है. झूठ फरेब कितना भी ताकतवर क्यों ना हो आखिर सच उजागर ही होता है. मनोज कुमार गैरमुस्लिम होते हुए भी साम्प्रदायिकता को जोरदार तमाचा लगाते हुए इस्लाम विरोधियो को आईना दिखाया. सच को सच लिखा. हम आपके लिए उनके यह विचार प्रकाशित कर रहे है.

तो फिर इस्लाम एक बुरा धर्म हैं!!!
जब से इस्लाम धर्म दुनिया में आया हैं , तब से ही इस्लाम को बुरा कहने वाले भी पैदा हो गये हैं।
इस्लाम धर्म से चिढने वालों की हर वक़्त यही कोशिश रहती हैं कि किसी न किसी तरीके से इस्लाम को बदनाम किया जाए।
और वे इस्लाम धर्म के प्रति अलग अलग प्रकार की भ्रामक बातें फैलाते रहते हैं।आखिरकार वे इस्लाम से चिढते क्यों हैं? जबकि
✅ इस्लाम कहता है कि हमें एक ईश्वर को पुजना चाहिए जो हम सबका मालिक हैं। जिसका कोई रंग हैं ना कोई रूप हैं। जिसे किसी ने नहीं बनाया पर उसने हर चीज़ को बनाया। अगर ये बात बुरी हैं तो फिर इस्लाम एक बुरा धर्म हैं।
✅ इस्लाम कहता है कि तुम्हारी मेहनत की कमाई से 2.5% गरीबों को देना हर हालत में जरूरी हैं। ऐसी शिक्षा देना गलत है तो फिर इस्लाम एक बुरा धर्म हैं।
✅ इस्लाम कहता है कि तुम लोगों की मदद करोगे तो खुदा तुम्हारी मदद करेंगा। और जो कुछ भी तुम अपने लिए चाहते हो वही सबके लिए भी चाहो तो ही एक सच्चे मुसलमान बन सकते हो। ऐसी शिक्षा देना गलत है तो फिर इस्लाम एक बुरा धर्म हैं।
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✅ इस्लाम कहता है कि तुम एक महीने तक सुबह से शाम भूखे और प्यासे रहो ताकि तुम्हें एहसास हो सकें कि भूख और प्यास क्या होती हैं। अगर ऐसी बात सिखाना गलत हैं तो फिर इस्लाम एक बुरा धर्म हैं।
✅ इस्लाम कहता है कि तुम्हारे घर बेटी पैदा हो तो दुखी मत होना क्योंकि बेटियाँ तो खुदा की रहमत (इनाम) हैं। और जो व्यक्ति अपनी मेहनत की कमाई से अपनी बेटी की परवरिश करें और उसकी अच्छे घर में शादी कराएँ तो वो जन्नत (स्वर्ग) में जायेगा। ऐसी शिक्षा देना गलत है तो फिर इस्लाम एक बुरा धर्म हैं।
✅ इस्लाम कहता है कि सबसे अच्छा आदमी वो हैं जो औरतों के साथ सबसे अच्छा सुलूक करता हैं। अगर ये बुरी बात है तो फिर इस्लाम एक बुरा धर्म हैं।
✅ इस्लाम कहता है कि विधवाएं मनहूस नहीं होती इन्हें भी एक बेहतर जीवन जीने का पूरा अधिकार है। इसलिए विधवाओ और उनके बच्चों को अपनाओ। अगर विधवाओ को अधिकार देना गलत है तो फिर इस्लाम एक बुरा धर्म हैं।
✅ इस्लाम कहता है कि ऐ मुसलमानों जब नमाज पढ़ो तो एक दूसरे से कन्धे से कन्धा मिलाकर खड़े रहो क्योंकि तुम सब आपस मे बराबर हो तुम में से कोई छोटा या बड़ा नहीं हैं। समानता की शिक्षा देना गलत है तो फिर इस्लाम एक बुरा धर्म हैं।
✅ इस्लाम कहता है कि ऐ मुसलमानों अपने पड़ोसियों से अच्छा बर्ताव करो चाहे तुम उन्हें जानते हो या न जानते हो। और खुद खाने से पहले अपने पड़ोसी को खाना खिलाओ। पड़ोसी की मदद करना गलत है तो फिर इस्लाम एक बुरा धर्म हैं।


✅ इस्लाम कहता है कि शराब और जुआ सारी बुराइयों की जड़ है। इनसे अपने आप को दूर रखे। अगर समाज में मौजूद बुराइयों को समाप्त करना बुरी बात हैं तो फिर इस्लाम एक बुरा धर्म हैं।
✅ इस्लाम कहता है कि मजदूर का पसीना सूखने से पहले पहले उसकी मजदूरी दे दो। और कभी किसी गरीब और अनाथ की बद्दुआ न लेना नहीं तो बरबाद हो जाओगे। अगर ये बुरी बात है तो फिर इस्लाम एक बुरा धर्म हैं।
✅ इस्लाम कहता है कि अपने आप को जलन (ईर्ष्या) से दूर रखो क्योंकि ये तुम्हारे (नेकियों) अच्छे कामों को ऐसे बरबाद कर देती हैं जैसे दीमक लकड़ी को। ऐसी शिक्षा देना गलत है तो फिर इस्लाम एक बुरा धर्म हैं।
✅ इस्लाम कहता है कि बुजुर्ग व्यक्ति का सम्मान करना मानों खुदा का सम्मान करने जैसा हैं। अगर तुम जन्नत (स्वर्ग) में जाना चाहते हो तो अपने मा बाप को हर हाल में खुश रखो। ऐसी शिक्षा देना गलत है तो फिर इस्लाम एक बुरा धर्म हैं।
✅ इस्लाम कहता है कि सबसे बड़ा जिहाद ये है कि कोई व्यक्ति अपनी इच्छाओं को मारे और अपने आप से लड़े। ऐसी शिक्षा देना गलत है तो फिर इस्लाम एक बुरा धर्म हैं।
✅ इस्लाम कहता है कि अगर खुश रहना चाहते हो तो किसी अमीर को मत देखो बल्कि गरीब को देखो तो खुश रहोगे। और लोगों से अच्छा बर्ताव करना सबसे बड़ा पुण्य का काम हैं। अगर ये बुरी बात है तो फिर इस्लाम एक बुरा धर्म हैं।
✅ इस्लाम कहता है कि हमेशा नैतिकता और सच्चाई के रास्ते पर चलो। बोलों तो सच बोलों, वादा करो तो निभाओ और कभी किसी का दिल मत दुखाओ। ऐसी शिक्षा देना गलत है तो फिर इस्लाम एक बुरा धर्म हैं।
✅ इस्लाम कहता है कि सबसे बुरी दावत वह हैं जिसमें अमीरों को तो बुलाया जाता हैं परन्तु गरीबों को नहीं बुलाया जाता हैं।
✅पानी को ज़रूरत तक ही इस्तेमाल(उपयोग) करना। और बिना वजह पानी का दुरूपयोग करना गुनाह(पाप)। ऐसी शिक्षा देना गलत है तो फिर इस्लाम एक बुरा धर्म हैं।
✅रास्ते में अगर कोई तक़लीफ़ देने वाली वस्तु(पत्थर,कील,) होतो उसे किनारे करना जिससे दुसरो को पीड़ा न हो। ऐसी शिक्षा देना गलत है तो फिर इस्लाम एक बुरा धर्म हैं।
 ✅इस्लाम कहता है कि अन्जान महिलाओ पर नज़र पड़े तो आँखें नीची कर लो क्योंकी गैर महिलाओ को बुरी नजर से देखना गुनाह(पाप) है। ऐसी शिक्षा देना गलत है तो फिर इस्लाम एक बुरा घर्म है। ??? आप ही सोचिये के इस्लाम बुरा धर्म है या उसे बुरा केहने वाले।। कुरान सिर्फ मूसलमांन की धार्मिक किताब नही है। कुरान तो हिन्दुस्तान ही नही दुनिया के हर इंसान के लिए, हर समाज के लीये सही रास्ते पे चलने का ओर एक बेहतरीन जिंदगी जीने का रास्ता है।। हर इंसान को कुरान पढ़ना चाहिए ओर उसे समझना चाहिए ।।
-मनोज कुमार All India Youth federation - AIYF
President East Delhi है.

फिलहाल सोशल मीडिया पर एक त्सुनामी आया है उस त्सुनामी का नाम है तैमूर, हाल ही में एक बच्चे को करीना कपूर और सैफ अली खान इस दंपत्ति ने जन्म दिया. शादी उन्होंने की, बच्चा उन्होंने पैदा किया, नाम उन्होंने रखा, लेकिन पेट में दर्द भक्तो के हो रहा है. यह बात सच है के नाम रखने से कोई वैसा नहीं बन सकता जिसका नाम रखा गया हो. इस विषय पर सोशल मीडिया पर बवाल मचा हुआ है. कोई तीखा जवाब दे रहा है तो कोई कॉमेडी कर रहा है, तो कोई सवाल पूछ रहा है.

जिस तरह से महापुरुष, देवी-देवता, रूशी-मुनियों के नाम करोडो लोगो ने रखे है लेकिन कोई महापुरुष बना ना कोई रूशी बना ना कोई भगवान् देवी देवता बना. फिर तैमुर नाम पर इतना बवाल क्यों ? बस यह सिर्फ साम्प्रदायिकता है. वरना निर्भया के बलात्कारी के नाम के लोगो पर भी आपत्ति जताई जाती, लेकिन ऐसा कुछ नहीं होता. - संपादक

मुंबई के एल्फ़िंस्टन ब्रिज हादसे को लेकर मनसे प्रमुख राज ठाकरे ने मोदी सरकार पर तीखा हमला किया है. उन्होंने मोदी सरकार की तुलना आतंकियों से करते हुए कहा कि हमें पाकिस्तान जैसे दुश्मनों या आतंकियों की जरूरत ही क्या है? ऐसा लगता है कि लोगों की जान लेने के लिए हमारी अपनी रेलवे ही काफी है.

इस दौरान उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को कटघरें में खडा करते हुए कहा कि मोदी सरकार झूटे वादे करके ही सत्ता में आई हैं और अब उनकी पोल खुल गई है. ठाकरे ने कहा की, कितना झूठ बोलता हैं इस देश का प्रधानमंत्री. इतना झूठ बोलने वाला प्रधानमंत्री आज तक उन्होने नहीं देखा.

एएनआई से बात करते हुए ठाकरे ने कहा कि मुंबई लोकल से जुडे मुद्दे की लिस्ट को 5 अक्टूबर तक रेलवे तक सौंप देंगे. इसके बाद अगर समय पर उन्होंने स्थिति को सही नहीं किया, तो हम अपने हिसाब से काम करेंगे. उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि जब तक सभी मुंबई में रेल में सफर करने वाले यात्रियों के मुद्दे नहीं सुलझ जाते, वह बुलेट ट्रेन परियोजना को शुरू नहीं होने देंगे.

ठाकरे ने कहा, “मैं बुलेट ट्रेन परियोजना के लिए एक ईंट भी नहीं लगाने दूंगा. पहले मुंबई के यात्रियों की बुनियादी समस्याएं सुलझाइए. मोदी चाहें तो गुजरात में इसका निर्माण करा लें. अगर वह बल प्रयोग करेंगे, तो हम भी जबाव देंगे.”

उन्होंने दावा किया कि बुलेट ट्रेन परियोजना को आगे बढ़ाने के लिए ही सुरेश प्रभु के स्थान पर पीयूष गोयल को रेल मंत्री बनाया गया है। उन्होंने कहा, “प्रभु अच्छे थे, गोयल किसी काम के नहीं हैं।”
(कोहराम से)

अमेरिकन युआन रिडली
ट्विन टावर अटैक के बाद एक बात अमेरिकन योरोपियन मीडिया द्वारा प्रिप्लांड तरीके से वाइरल की गई कि हवाई जहाज़ के टकराने से ठीक पहले मुहम्मद अता ने कहा कि जश्न मनाओ साथियो ... हमने कुरान को अपनाया और अब हम जन्नत जाने वाले हैं । निशाना सीधा कुरान को लेकर प्रोपेगेंडा करने का था एक पादरी तो इतना जज़्बाती हो गया कि उसने कुरान को सार्वजनिक जलाने की घोषणा करदी पादरी और मीडिया के इस प्रोपेगेंडा ने योरोप में कुरान को लेकर इतनी जिज्ञासा पैदा करदी की योरोप में कुरान की पूर्ति होना मुश्किल हो गयी ।

प्रिंट से ज्यादा ऑर्डर थे , और बेश्तर महिलाओं की संख्या ज्यादा थी जो कुरान खरीदने के लिए कई दिनों तक बुक स्टोर के चक्कर लगाती रहीं  और जब कुरान को इस हद तक पढ़ा गया कि आज योरोप में यह संकट पैदा हो गया है कि आख़िर कैसे रोकें युवाओं को मुसलमान होने से धर्म परिवर्तन कर मुसलमान होने की जैसे योरोप में उसी वक़्त से हवा चल रही है मैं शुक्रिया अदा करती हूँ फासिज़्म का , सैफरोनिज़्म का , संघ का , अदालतों का और सरकार का और सबसे बढ़ कर मीडिया का मैं दिली साधुवाद देती हूँ मीडिया को जो कि एक नई सुबह, नई बेदारी नए इंकलाब के लिए मुसलमानो को ज़मीन तैयार करके दे रही है साधुवाद देती हूँ कि मुस्लिम कौम को टीवी पर लगातार प्रसारण देते रहने के लिए ब्राह्मणवाद हार्ड है पर स्मार्ट नही है ...

जो स्मार्ट होता तो दुनिया का सबसे बड़ा धर्म परिवर्तन का गहवारा भारत न बनता ... हालांकि अपनी कोशिशों से ब्रह्मानिज़्म ने इस परिवर्तन को रोकने की कोशिश की होगी . ... लेकिन यह इस्लाम है मेरी जान , प्रतिकूल ही तो इस्लाम के अनुकूल है इतिहास गवाह है. 9/11 के बाद 10 महीने में 34 हज़ार युवाओं ने इस्लाम को अपनाया अकेले अमेरिका में 9/11 के बाद 9 महीने में 28 हज़ार युवाओं ने इस्लाम को स्वीकार किया यूरोप में न तलवार ,न तोप, तो क्या ??

यदि आप खजुराहो के मंदिर की कृतियां देखे य़ा मंदिर, या फिर अजन्ता-एलोरा की गुफा देखेंगे तो भारत में अापको इस्लाम के आने से पहले की संस्कृती का अंदाजा हो जायेगा ! आइए जानते हैं इस्लाम के आने से पहले क्या थी भारत की संस्कृति !

गे और लेस्बियन तो छोटी बात है मनुष्यों की जानवरों से संभोग करती तस्वीरें अापको मिल जायेंगी ! कामसूत्र जब यहाँ से लिखा गया तो दुनिया के पास ऐसी कोई पुस्तक नही थी ! हिंदू धर्म ग्रंथो में गे और लेस्बियन का न मात्र उल्लेख है अपितु उन्हें शिव का आशिर्वाद प्राप्त करते दिखाया गया है ! - वेदों में बड़े देवता वरुण और मित्रा के अंत्रंग संबंधों का वर्णन है,  - वेद के सबसे बड़े भगवान अग्नी के समान एवं शिव के वीर्य चाटने की कथाएँ हैं,

- अग्नी के शिव के वीर्य का मुखपान करने से कार्तिकिये के जन्म का वर्णन है ! परंतु यह सब तेरहवीं शताबदी के पहले का है !

#इस्लाम_के_आने_के_बाद_का_भारत
- भारत में इस्लाम के प्रादुरभव के साथ ही आम जन-मानस पर इसका सीधा प्रभाव पड़ा,
- लोगों में शरीर पूर्ण रुप से ढ़कने का प्रचलन शुरू हुआ !
- स्त्रियों में दुपट्टा ओढ़ने का रिवाज आया तो वहीं कहीं-कहीं महिलाओं में घूंघट ओढ़ने का भी रिवाज बढ़ा, जोकि मुस्लिमों के बुर्के से प्रभावित था !
- पुरूषों ने भी उपर के तन को ढ़कना शुरू किया, स्त्री-पुरूष के आंतरिक संबन्धों के नियम कड़े हुए !

#1947_के_बाद_का_भारत
- अंग्रेजों के आ जाने और पाकिस्तान के अलग हो जाने से 1947 से भारत पर इस्लाम का प्रभाव क्रमश: घटता गया पर 1947 के बाद बने कानून में "गे" संबन्धों पर 10 साल के दंड़ का प्रावधान किया गया !
- सदियों तक भारत पर प्रभाव ड़ालती इस्लामिक संसकृती से बनी मानसिकता का ही परिणाम था कि खजुराहो संसकृती पीछे जा चुकी थी !
- 70 सालों में धीरे-धीरे कर के भारत से इस्लाम का प्रभाव अब समाप्त हो गया है और भारत पुन: उसी संस्कृती की ओर अग्रसर है !

#अंधभक्तों_का_भारत
- भारत उसी योनि अंगों की ओर प्रमुखता से अग्रसर हो रहा है,
- समलैंगिक संबंध जिन्हें हेय दृष्टि से देखा जाने लगा था आज फिर से कानूनी मान्यता मिलने पर निर्लज्जता के साथ समाज में रोग की भांति फैलने लगी है !
- इसके अलावा पत्नी का किसी गैर पुरुष से संबंध और पति का गैर पत्नी के साथ संबंध अब नाजायज न कहला कर आत्मसंतुष्टि का पर्याय बन गया है !
- यही हाल रहा तो नियोग और एक स्त्री पर चार पांच पुरुष या पूरा झुंड कानूनन सही ठहरा दिया जाएगा,
क्योंकि कानून भी अब सत्ता की स्याही से लिखा जाने लगा है !

सात जेलें और 500 मुसलमानअल्लाह जिससे चाहे काम ले सकता है
कुवैत के एक बेहद मेहनती छात्र ने कभी यह तो सपने में भी नहीं सोचा था कि अमरीका में उसे जेल की सलाखों के पीछे अपने जीवन का एक बड़ा हिस्सा गुज़ारना पड़ेगा।

अमरीकी जेल की समस्याओं और परेशानियों के बावजूद " यासिर अलबहरी " ने जेल में सब कुछ भूल कर किताबें लिखी और बहुत से क़ैदियों को मुसलमान बना दिया। उन्हें, अमरीकी अदालत ने यौन शोषण के आरोप में 15 साल की जेल की सज़ा सुनायी थी हालांकि वह निर्दोष थे।

दुर्भाग्य का आरंभ
यासिर अलबहरी, पीएचडी के लिए फ्लोरीडा चले गये जहां उनके एक भाई पहले से ही पीएचडी कर रहे थे। यासिर के पास पढ़ाई से समय बच रहा था इस लिए उन्होंने अपने छोटे भाई के साथ मिल कर एक " अरबी कॉफी हाउस" बनाने की योजना बनायी। यह कॉफी हाउस तीन लाख डॉलर में खुल गया जिसें पूर्वी खाने पीने की चीज़ें मिलती थीं, कुछ ही समय में उनका कॉफी हाउस फ्लोरीडा में बेहद मशहूर स्थलों में गिना जाने लगा। यह कॉफी हाउस युनिवर्सिटी के निकट था। कॉफी हाउस से प्रतिदिन कम से कम दो हज़ार डॉलर की आमदनी होने लगी।

" यासिर अलबहरी "
यासिर अपनी इस कामयाबी से बेहद खुश थे, उन्होंने सन 2007 में दो लाख डॉलर में एक फ्लैट खरीदा और अपनी बीवी को सरप्राइज़ गिफ्ट देना चाहते थे तभी कॉफी हाउस में काम करने वाली एक वेटर्स ने उन पर यौन शोषण का आरोप लगा दिया और पुलिस ने यासिर को गिरफ्तार कर लिया। उस वेटर्स को मात्र 4 दिन पहले नौकरी पर रखा गया था। अमरीकी वकील ने 5 लाख डॉलर फीस के साथ वादा किया कि चूंकि उनके खिलाफ कोई सुबूत नहीं है इस लिए उन्हें जल्द ही रिहा कर दिया जाएगा क्योंकि मेडिकल रिपोर्ट में भी यौन शोषण की पुष्टि नहीं हुई थी मगर अंत में ज्यूरी ने 15 साल जेल की सज़ा सुनायी।

सात जेल, 500 मुसलमान!
यासिर अलबहरी को फ्लोरीडा राज्य की सात जेलों में अलग अलग समय में रखा गया, जेल में उनके साथ अधिकांश अश्वेत और लेटिन अमरीका के लोग थे और जब यासिर अलबहरी नमाज़ पढ़ते तो वह सब बड़े ध्यान से उन्हें देखते और फिर इस्लाम के बारे में उनसे सवाल पूछते। यासिर भी चूंकि काफी पढ़ लिखे थे इस लिए वह इस्लाम की बारीकियों से उन्हें अवगत कराते। इस प्रकार यासिर अलबहरी ने अमरीका में पंद्रह साल के दौरान सात जेलों में कुल मिलाकर 500 से अधिक बंदियों को मुसलमान बनाया और 22 किताबें लिखीं।

यासिर अलबहरी की पंद्रह साल की जेल की अवधि अगले महीने पूरी होने वाली है जिसके बाद उन्हें कुवैत वापस भेज दिया जाएगा जहां वह फिर से नयी ज़िदंगी शुरु करेंगे लेकिन शायद वह यह न सोचें कि अमरीकी जेलों में उनके 15 साल बर्बाद हो गये! (Q.A.) साभार, अलजज़ीरा नेट

 
मैं मानव धर्म को मानता हूँ । बहुत हद तक नास्तिकता भी मेरे अंदर है पर मैं अपनी नास्तिकता किसी के ऊपर थोपता नहीं। रमजान के महीने की शुरुआत हो चुकी है। अगले एक महीने तक मुस्लिम समुदाय के लोग रोजे रखेंगे। इस दौरान पांचों वक्त की नमाज के लिए भी लोग मस्जिद में जाते हैं।देख रहा हूँ देश के अधिकांश जी हाँ अधिकांश हिन्दुओं में मुस्लिमों के लिए दिलों दिमाग में गोबर भरा हुआ है। रोजे का मजाक उड़ाया जा रहा है। पड़ोस में रहने वाले अब्दुल ,शाहिद किराना दुकान वाले गफूर ,रहमान ,साथ में काम करने वाले सलीम ,जुबेर से ज्यादा ये लोग आईएस और तालिबान वाले मुस्लिमों को जानते हैं। ये लोग कभी भारतीय मुस्लिमों को जानना ही नहीं चाहते।

 कभी किसी दोस्त ने यहाँ लिखा था आप एक भारतीय मुस्लिम से दशहरा त्यौहार ,दीपावली त्यौहार ,होली त्यौहार के बारे में पूछेंगे तो वो सब कुछ बता देंगे ,यहाँ तक की हिन्दुओं के आराध्य भगवान राम के बारे में भी कोई भी मुस्लिम बता देंगे। देश के सभी मुस्लिम सभी हिन्दू देवी देवताओं के बारे में जानकारी रखते है। यहाँ तक की त्योहारों में हिन्दुओं के पूजा में आने वाले सामान भी बेचते हैं। अब आप किसी हिन्दू से पूछिए मुस्लिम त्योहारों इस्लामी नया वर्ष - 1 मुहरम,आशूरा 10 मुहरम ,मीलाद उन-नबी ,शब-ए-मेराज ,शब-ए-बारात,रमज़ान (महीना),शब-ए-क़द्र या लैलतुल क़द्र ,जुमातुल विदा,ईद उल-फ़ित्र,ईद-उल-अज़हा या बक्रीद - ज़ु अल-हज्जा या पैगंबर मोहम्मद,ईमाम हुसैन इसमें से किसी एक के बारे में भी कुछ जानते हैं। असल में आप जानना ही नहीं चाहते। क्योंकि जो गोबर भरा हुआ है आपके दिमाग में आपको दूसरे धर्म के बारे में सोचने को ही नहीं दे रही हैं।

 आप मुस्लिमों को बीफ खाने वाले ,चार बीवियां रखने वाले ,अपनी बीवियों को मुंह पर ही तीन तलाक देने वाले ही सोच कर रखे हो। जबकि ऐसा करने वाले लगभग न के बराबर है। इससे ज्यादा ये कुरुतियां तो आपके धर्म में है लेकिन आप अपने धर्म को भला क्यों बुरा बोलेंगे वह तो श्रेष्ठ है। नागा बाबा अश्लीलता नहीं फैलाते ,काली को आप बलि में भैस ,बकरा नहीं चढ़ाते ,घास पर गोमूत्र डालने से वो जल जाती है लेकिन आपके पेट में जाते ही वो गंगा जल से भी पवित्र हो जाता है ,हिन्दू अपनी पत्नियों को सात जन्म से पहले नहीं छोड़ते। आपके दिल और दिमाग में जो गंदगी जो भरी हुई है वो किसी बड़े शहर के बाहर पड़े कूड़े के ढेर से भी ज्यादा है,और इसे साफ भी नहीं किया जा सकता। आप नफरत बांटिए हम मोहब्बत बांटा करेंगे।
Vikram Singh Chauhan जी की वाल से।

एक 16 साल के एक मुसलमान लड़के को लोकल ट्रेन में भीड़ ने पीट पीट कर मार डाला। अब लोग बोल रहे हैं इसे साम्प्रदायिक रंग नहीं दिया जाये। लेकिन भीड़ का शिकार सिर्फ बेगुनाह मुसलमान क्यों हो रहे हैं? अख़लाक़ के बाद से हत्या का दौर जारी है। दरअसल इस भीड़ का नेतृत्व सत्ता में बैठे लोग कर रहे हैं ,उनके मुसलमानों को लेकर दिए जा रहे बयान कर रहे हैं ,टीवी न्यूज़ चैनल कर रहे हैं, उनके बड़बोले नेता मंत्री कर रहे हैं ,कथित योगी ,गुरु और बाबा कर रहे हैं। इन सबने मिलकर बहुसंख्य हिन्दू को मुसलमानों के खिलाफ उकसाया है और उकसा रहे हैं। इस मासूम की मौत के लिए ये सब जिम्मेदार हैं। जिन लोगों ने उस युवक को मारा उन्हें उनकी टोपी से दिक्कत थी जो मुस्लिम भाई हमेशा पहनते हैं। पहले खान पान ,फिर दाढ़ी और अब टोपी सबसे दिक्कत है। कोई मुसलमान गाय पाल रहा होगा वो भी अब बंद कर दिया होगा। हे राम ये क्या हो गया इस देश में !!

Ramshanker Tiwari
हर शहर में इस प्रकार के हिन्दू-अतिवाद , गुंडागर्दी का विरोध होना चाहिये । ऐसे टी वी चेनलों, साधुओं , योगियों , नेताओं को बेनक़ाब करना पड़ेगा । हिन्दू मुसलमान दोनों को आगे आना पड़ेगा ।

पहले ऐसा तो कभी नहीं था मेरा यह देश।

देश निर्माण यज्ञ में देशव्यापी NRC का एक फायदा तो होगा कि एक झटके में करोड़ों लोग बिना शर्त, बिना ना-नुकुर, बिना शिकायत, अमानवीय परिस्थितियों में भी काम करने के लिए तैयार मिल सकते हैं। तमाम लोग यह साबित करने में असफल रहेंगे कि उनके बाप दादा भारतीय ही थे और अचानक नागरिक से अनागरिक बन जाएंगे। ये लोग अधिकारविहीन अवैध नागरिक हो जाएंगे। चूंकि CAB तो विदेश से आने वालों पर लगेगा तो ये लोग CAB के जरिये शरणार्थी भी नहीं बनाए जा सकेंगे। उनमें से चुनिंदा लोग ही केवल शरणार्थी भर का दर्जा ही हासिल कर पाएंगे जिनके कि अधिकार सीमित ही होते हैं। बस आप तो इतनी खैर मनाते रहिए कि इस बाहर होने के प्रकिया में आप और आप के अपने अवैध नागरिक बनने से कैसे बचे रह पाएंगे क्योंकि असम में तो सुनते हैं कि पूर्व सैन्यकर्मी, स्वतंत्रता सेनानी, राजनीतिक रूप से सक्रिय, पीढ़ियों से रह रहे आदि तमाम प्रकार के लोगों के परिवार के लोग भी चपेटे में आ ही गए। यह भी उनका एक नोटबंदी टाईप मास्टरस्ट्रोक ही है।

मौका ए ग़नीमत है नार्थ ईस्ट सुलग उठा है उनकी थिंकिंग भले ही बाकी भारत से अलग हो मगर टारगेट वही है जो हम सबका है CAB, अलीगढ़ और देवबंद ने सबसे पहले बिगल फूंका है मुबारकबाद, देवबंद के कायम मुकाम जमीअत मैदान में डटी हुई है और जमीअत की ताकत जमीअत का कैडर देवबंद स्टूडेंट्स से कहीं ब्राड है। देवबंद के तलबा पढ़ाई पर फोकस करें, तलबा के वालिदैन जमीअत के बैनर तले मैदान में हैं। जामिआ दिल्ली ने आज कुरबानी की अज़ीम मिसाल पेश की है JNU की ताकत के साथ मिलकर जामिआ भारत की नई तारीख लिखेगा इन्शाल्लाह

कांग्रेस फार्म में आ चुकी है बताने की ज़रूरत नहीं कि कांग्रेस का प्रोटेस्ट में होना कितनी बड़ी मोरल पावर बूस्टिंग कर सकता है। मजलिस के कैडर ने पहली बार भारत के किसी मेन स्ट्रीम आंदोलन में ज़बरदस्त हिस्सा लिया है मजलिस को मुख्य धारा में आने की बहुत बधाई। समाजवादी पार्टी भी मैदान में निकलने की तैयारी कर रही है अखिलेश यादव नौजवान नेता हैं अखिलेश की मौजूदगी आंदोलन को नई ऊर्जा प्रदान करेगी। आने वाले दिनों में दिल्ली की ज़िम्मेदारी बढ़ने वाली है भारत के अलग-अलग हिस्सों से आंदोलन कारी दिल्ली पंहुचेंगे, ऐसे में दिल्ली को मेजबानी का भारी भरकम बोझ उठाना है। यही मौका है अभी नहीं तो कभी नहीं। दिल्ली को भर डालो, हर सड़क हर गली बस आंदोलन ही आंदोलन, दिल्ली की आवाज़ पूरी दुनिया में गूंजती है।

#CAB परेसान तो मुस्लिम को करेगा लेकिन डसेगा भारत की अर्थव्यवस्था को, या कहिये तो भारत को डसना शुरूकर चुका है। नार्थ ईस्ट के बदे हिस्से का कारोबार ठप है। देश के बाकि जगहों में भी लोग आर्थिक गतिविधि छोड़कर प्रोटेस्ट कर रहे है। दिक्कत तो तब आएगा जब #NRC का ऐलान होगा तब देश की जनता सब काम छोड़कर कागज पत्तर सही करने में लग जायेगी। लोग अनुत्पादक काम के लिए लम्बी लम्बी छुट्टी लेने लगेंगे। गरीब लोगों  पर पहाड़ ही टूट पड़ेगा उनको कागज निकालने पड़ेंगे जिसके लिए एक तो बाबू साहेब और दलालो को बड़ी घुस देनी पड़ेगी जिससे उनका वोटर कार्ड और पुराना राशन कार्ड या अन्य कागज मिल पाए। इसको बनवाने के लिए घुस और सरकारी खर्चे के अलावा अपना काम भी छोड़ना पड़ेगा और साथ ही साथ आने जाने में पैसा अलग से खर्च होगा।

मतलब गरीबो का कमर तोड़ देगी। गरीबो को ये सब काम सूद पर पैसे लेकर भी करना और करवाना होगा। इन सबका बहुत ही बुरा असर देश की अर्थव्यवस्था पर भी पड़ेगा। #नोटबन्दी , #GST के बाद देश की अर्थव्यवस्था के लिए तीसरा और सबसे बड़ा अभिशाप साबित होने वाला है। बाकि मंदी, अत्यंत गरीबी और लॉ एंड आर्डर का रिलेशन तो सबको पता होगा ही। वैसे भी कहा जाता है, "मरता क्या नही करता"




रात के 1 बज रहे थे और जामिया मिलिया इस्लामिया में पड़ रही बहनों ने मोर्चा थामा हुआ था
हमारी बहेने #CAB बिल के खिलाफ और इस तानाशाही सरकार के खिलाफ लड़ रहीं हैं

आपके के जज़्बों को सलाम हमारी बहेनों
वो कह रहा है, कुछ दिनों में मिटा के रख दूंगा नस्ल तेरी
है उसकी फितरत डरा रहा है, है मेरी आदत डरा नहीं हूं
~राहत इन्दौरी

ये #कश्मीर_नहीं_आसाम" है!
तो फिर ये जल क्यूँ रहा है? जबकि #भाजपा कह रही है कि उसने राष्ट्रहित में "ऐतिहासिक" कार्य करा है??
#CAB_is_anty_India


आप सभी कल जुमे के वक़्त अपनी अपनी #मस्जिदों_के_इमामों से कहें कि #NRC और #CAB को रद्द करने और इसमें कोई हिस्सा न लेने का ऐलान करें, हो सके तो जुमे के बाद सभी एहतिजाज करके मुखालिफ़त दर्ज कराएं। आख़िर जुमे की नमाज़ और ख़ुतबे का यह भी मक़सद है उम्मत को मौजूदा मसायल से आगाह करना और उनके हल देना.

जब इंसान अपनी मौत को बहुत करीब से देखता है तो उस वक्त उसे 2 लोगों की याद सबसे ज्यादा आती है। एक वो जिससे वो सबसे ज्यादा प्यार करता है और दूसरा वो जिसपे सबसे ज्यादा भरोसा होता है। मुशर्रफ अली के सैकड़ों रिश्तेदार रहे होगे लेकिन इस भाई ने मौत के बक्त अपने दोस्त मोनू अग्रवाल को याद किया। इससे ये पता चलता है मुशर्रफ अली को सबसे ज्यादा ऐतबार अपने दोस्त मोनू अग्रवाल पर था। मुशर्रफ अली के आखिरी अलफ़ाज़ थे मै जा रहा हूँ भैय्या मेरे बीबी बच्चों का ख्याल रखना। सबसे महत्वपूर्ण मुशर्रफ ने अपने अन्तिम समय में कर्ज अदायगी की मंशा रखी। इससे ये पता चलता है ये भाई कितना ईमानदार और नेकदिल इंसान था। ये दोस्ती नफ़रत के सौदागरों के मुँह पर एक तमाचा है। 

दोस्ती का कोई धर्म नहीं होता आपस में कितना प्यार रहा होगा जो जिन्दगी के आखिरी लम्हों में याद क्या है। इंडिया वालों देखो ये होती है मोहब्बत इस भाई ने अपने हिन्दू भाई पर विश्वास किया ऐसी मोहब्बत ऐसा ही अपना पन सभी हिंदु मुस्लिम भाइयो को बना कर रखना चाहिए यही है हमारा असली हिन्दुस्तान। अल्लाह पाक मरहूम की मगफिरत फरमाए। माहिरा का दिल से सलाम आप दोनों भाईयों की दोस्ती को। मेरी सभी अमनपरस्त भाईयों से गुजारिश है इस पोस्ट को ज्यादा से ज्यादा शेयर करे। 
-Mahira Khan

सोशल मीडिया की सेलिब्रिटी मानी जाने वाली किरण यादव ने एक और पोस्ट लिखकर सनसनी फैला दी है. सच बहुत कडवा होता है यह फिर एक बार साबित हुआ है. हाल ही में सोशल मीडिया पर 10 लाख फॉलोवर वाली किरण यादव को मीडिया ने भी खूब सराहा. किरण यादव अपने बेबाक कलम की वजह से फेसबुक ट्विट्टर पर चर्चा का विषय बनी हुई है. इस बार उन्होंने अपने फॉलोवर के बारे में एक बात बहुत जबरदस्त की, उन्होंने कहा की मेरे फॉलोवर हिन्दू मुस्लिम एकता के प्रतिक है. आईये देखते है किरण यादव ने इस बार क्या कहा.

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हिन्दुस्तान में हमारे मुस्लिम चाचा भाई नें इतिहास रच दिया हैं कुतुब मीनार से लेकर लालकिला से ताज महल से मिसाइल मौन तक हमारे मुस्लिम चाचा भाई की देन हैं 70 साल से हम सब हिन्दू क्या किया लूट भ्रष्टाचार कोई एक उपलब्धियाँ बता दे जो हम सब हिन्दू हासिल की हैं 10 साल सिख प्रधानमंत्री थें उनकी उपलब्धियाँ देखना हैं तो जम्मू से काश्मीर तक असम तक चले जायें दिख जायेगी तीन साल में एक भी उपलब्धियाँ बता दे में अपनी गला काट कर अापके चरणों में रख दूँगी हम सब हिन्दुस्तानी किस से लड़ रहे हिन्दू मुस्लिम से हम सब हिन्दुस्तानी को भुखमरी से बेरोजगारी भ्रष्टाचार से लड़ने चाहिए लड़ रहे हैं हिन्दू मुस्लिम से सोशल मीडिया के ज्ञानी मोदी या दुनियाँ के किसी भी नेता या एक्टर की पोस्ट दिखा दो जिसका 45 हजार से उपर साझा किया हो यह मेरी friends followers नें world records बनाए हैं लेकिन दिखाने में शर्म आ रहा है आपको यह हिन्दू मुस्लिम एकता के प्रतीक है अभी भी सम्भलने की मैका हैं



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